Friday, January 22, 2021

I will always love you in all seasons

 

Stylish elderly couple kissing on embankment 

 

I will always love you in all seasons,

 

Winter, summer, spring or fall,

Love is blind does not care at all,

While it sees but have no reasons.

I will always love you in all seasons!

 

My love is so gentle and so sweet.

It will Stay blossomed in its own heat.

It does not care for your decisions.

I will always love you in all seasons!

 

You’re so wonderful, you ‘re so amazing,

My soul is so restless my heart is craving,

Living without you, is not in my vision,

I will always love you in all seasons!

 

-Ashoo

 

 

Thursday, August 6, 2020

क्या जानूं?

 

उम्र के बड़ते  कदम कहाँ ले जायेंगे क्या जानूं?
कौन कितने मेरे अपने    रह पाएंगे क्या जानूं?

जो बहुत क़रीब थे अब बहुत दूर नज़र आते हैं,
कितने दुःख दर्द वह और देते जायेंगे क्या जानूं?

अक्सर अब बीते दिनों की यादों में खो जाता हूँ,
कैसे वो लम्हे सपने हो कर रह जायेंगे क्या जानूं?

चाहता तो था जो दिल के क़रीब थे वो पास रहें,
वक़्त गुज़रते वो अनजाने हो जायेंगे क्या जानूं ?

उदासियों के समंदर की गहराई बढ़ती ही जाती है,
कब फिर खुशियों  के पल लौट पाएंगे कया जानूं ?

लिखने को तो बहुत कुछ है मन भरा पड़ा है जैसे,
लेकिन मेरे अपने कभी सुन भी पाएंगे क्या जानू ?

Monday, December 3, 2018

मैं ज़िन्दाँ हूँ अभी...


Sad man stock image. Image of loneliness, lonely, life - 46305085

छू  कर  मुझे  बता दो के मैं ज़िन्दाँ हूँ अभी !
वक़्त की ठोकरें लगा दो मैं ज़िन्दाँ हूँ अभी !!

वही रातें है वहीँ दिन, बस इक तुम ही नहीं,
होने का अहसास दिला दो मैं ज़िन्दाँ हूँ अभी !!


वही शहर, वही कूचें, और  रास्ते है वहीँ
तुम कहाँ हो यह बता दो, मैं ज़िन्दाँ हूँ अभी !!


तुम कुछ कहो या कहो  मैं यह कहता हूँ ,
मेरी मुहब्बत आज़मा लो, मैं ज़िन्दाँ हूँ अभी!


तेरी चाहत तेरी आरज़ू,  यह इबादत है मेरी,
अपनी वफ़ा का एहसास करा दो, मैं ज़िन्दाँ हूँ अभी !!

तेरा वस्ल, तेरी मुहब्बत, हमारी किस्मत में सही
बस मेरी यादों में  ही मुस्करा दो, मैं ज़िन्दाँ हूँ अभी!!

वो बचपन के दिन....




वो बचपन के स्कूल भी गए और वो भारी बस्ते भी गए !!

वो पुराने साथी भी गए,  स्कूल के टेड़े मेढे रस्ते भी गए !!


पहले जब माँ डांटा करती थी, उसकी गोद में सो  जाते थे ,

आज माँ ही नहीं है ज़िंदगी में ,बस  हम  बिलखते ही गए !!


ज़िंदगी की अनजानी राहों पर, जब से हम निकल पड़े ,

तब से मज़िल की तलाश में, बस खो कर फंसते ही गए !!


अब भी कभी तन्हाई में, यादों का इक हजूम सा आ जाता है,

तब हम गहरी उदासियों के घेरों में खुद बस कसते ही गए !!


अब ज़िंदगी की मंंजिल का तो कुछ आता पता नहीं है यारो,

इस पड़ाव पर रोना चाहते हुए भी, हम सिर्फ हँसते ही गए !!


Wednesday, March 30, 2016

बिरहा गीत

 

सांवरे तोहे मन बिसरा ना पाये!

हर पल मोहे तोरी याद सताए!


तड़प बिलख मोरी अँखियाँ बरसे,

दिन रैन तेरे दर्श को तरसे,

तुम बिन कछु भी ना सुहाए!


मन की लगी को कौन बुझाए

अब बिगडी को कौन बनाये,

मोरी अँखियाँ बह बह जाये !


पेड़, पौदे  सब तो वही है,

तेरा बिना कछु लागे न सही है,

कछु ना मोरे मन को भाये !

 

कारी अंखियों में कजरा लगा के,

राह तकूँ तोरी  दीया जला के,

याद इतना भी कोई ना आये!

 

जब से हुए तुम दूर सांवरे , 

नैना हुए तेरे दर्श को बाँवरे ,

सोच सोच मोरा मन घबराये !

Copyright !

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