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Monday, January 12, 2009

खेद सूचना ...

मैं गुज़स्ता कुछ रोज़ से अपनी ज़िन्दगी के बहुत खेद्पूरण घटना से दो चार हुआ हूँ । २० दिसम्बर के दिन मेरे पूजनीय माता जी (बीजी) भारत में स्वर्ग सिधार गए। इस ख़बर से मन बहुत खिन्न और उदास है। मैं अभी भारत से वापस आया हूँ। यह यात्रा मेरे लिए बहुत भावपूरण रही है और मन इस घटना से बहुत दुःख से भरा हुआ है। अभी कुछ रोज़ मेरा कुछ भी करने का या लिखने का मन नही। अपनी मानसिक स्तिथी ठीक होते ही कुछ लिख पाऊँगा। मैं सब पाठको से क्षमा चाहता हूँ।

आशु

7 comments:

संगीता पुरी said...

आपकी माताजी को श्रद्धांजलि.....हमारी प्रार्थना है , भगवान आपको जल्‍द इस कष्‍ट से उबरने में सहायता करें और आप जल्‍द ही सामान्‍य हो सकें।

विनय said...

जानकर बेहद आघात, परम पूज्य माता जी की आत्मा की शान्ति के प्रार्थना करता हूँ...

आपका सहयोग चाहूँगा कि मेरे नये ब्लाग के बारे में आपके मित्र भी जाने,

ब्लागिंग या अंतरजाल तकनीक से सम्बंधित कोई प्रश्न है अवश्य अवगत करायें
तकनीक दृष्टा/Tech Prevue

seema gupta said...

आपकी माताजी को श्रद्धांजलि.....भगवान उनकी आत्मा को शान्ति प्रदान करे और आपको इस दुःख को सहने की शक्ति...

regards

creativekona said...

Ashuji,
Mataji ke nidhan ka samachar padh kar bahut dukh hua.Mitra..jeevan men man ...kee jagah ..jo rikt ho gayee hai uskee poorti to kabhee sambhav naheen hai..han unkee yadon,unke sath beete har pal ko hee ham sanjo kar rakh sakte hain ..vahee yaden ...hame shakti de saktee hain...hamen jeevan men har kathinai se ladne ka hausala de saktee hain...un yadon ko bahut sanjo kar rakhiyega..yahee shayad unkee pavitra atma ke liye sabse badee shraddhanjali hogee.
Hemant

विवेक सिंह said...

हम आपका दु:ख समझते हैं .
ईश्वर की लीला है सब !
समय ही दर्द का इलाज करेगा !

ईश्वर आपके माताजी के आत्मा को शांति प्रदान करें !

KK Yadav said...

ईश्वर आपको शक्ति दें !!

आशु said...

मैं आप का सभी का बहुत आभारी हूँ जो आप ने मेरे दुःख के इन मुश्किल दिनों में मेरे दिल के असीम दुख में मेरा साथ दिया. मन का बोझ तो शायद कभी कम नहीं होगा लेकिन आप के साथ ने इस दुःख को सहने में शक्ति ज़रूर पर्धान की हैं. ज़िन्दगी चलती रहती हैं इस की रवानगी में कोई फरक नहीं पड़ता पर अगर आप जैसो दोस्तों का साथ हो तो दुःख और सुख के सभी क्षण का सामना करने की दुःख में सहारे की और सुख में उसे बढाने की
क्षमता आ जाती है. आप सबह का बहत बहत धन्यबाद

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