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Friday, November 14, 2008

ऐसा क्यों??


आप हम को दिल से भुलाते चले गए,
उमीदें हमारी ख़ाक में मिलाते चले गए!

हम तो सोचते थे ना भूलोंगे तुम कभी,
पर दुनिया नयी आप बसाते चले गए !

आओगे एक बार तो मिलने तुम कभी,
इस उम्मीद पे हम शम्म-ऐ जलाते चले गए !

पीते रहे हैं अशक के आए ना तेरी याद,
फ़िर भी तेरे खयालात हमे आते चले गए!

तेरी ज़फा के बदले तुम पर ऐ सनम,
दुनिया अपने प्यार की लुटाते चले गए!

यूँ ही छुपा ले जायेंगे हम दिल के दर्द को,
जिस तरह आंसू अब तक छुपाते चले गए !

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