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Sunday, January 17, 2016



तुम्हे देखा जो एक नज़र बस दिल मे समा गये  तुम !

अपनी मीठी मुस्कान से मुझे अपना बना गये  तुम !


सुना था मुहब्बत के बदले ज़रूर मिलती है मुहब्बत,

फिर क्यों मेरी मुहब्बत के जवाब से  कतरा गये तुम !


दिल से खेलना हम ने कभी सीखा नहीं ऐ जानेमन,

फिर क्यों सिर्फ बातों से मेरा दिल बहला गये तुम !


ना इज़हार किया, ना इक़रार किया कभी मुहब्बत का,

बस एक दोस्त की तरह से दोस्ती  निभा गये तुम !


मुहब्बत नहीं थी तो बस एक बार कहा होता,

सिर्फ बातों ही से  क्यों 'आशु  को बना गये तुम !

1 comment:

जमशेद आज़मी said...

बहुत ही प्यारी रचना की प्रस्तुति। मुझे बहुत अच्छी लगी।

Copyright !

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