Tuesday, April 12, 2011

तेरी नाराज़गी.....

झुकी नजरों को उठा कर जरा इक बार देखो!
मेरी आँखों में नज़र आएगा असीम प्यार देखो!!

ऐसी नाराज़गी क्या तुम बात क्यों नहीं करते,
तुम्हारी चुपी से डर लगता है मेरे यार देखो !!

तुम्हारा साथ है जैसे साथ हो  खिलते फूलों  का, 
थमा दो हाथ आ जाएगी इक नई बहार देखो !!

तुम्हे चुप देख कर दिल पर हजारों तीर चलते है,
तुम मुस्करा दो हम हो जायें तुझ पर कुर्बान देखो!

शिकायत कर के तो देखो मैं सब कुछ सुन लूँगा,
तुम्हारी कसम, उफ़ न करूंगा मेरे दिलदार देखो!!

तुम नाराज़ हो तो लगता है सारा जहान हो खफ़ा,
अब छोडो जिद, हंस दो मिले दिल को करार देखो!!

2 comments:

Pushpendra Singh "Pushp" said...

acchi gajal bhav bahut sundar
bahdhaii.......

आशु said...

पी सिंह जी,

मेरा होंसला बढाने के लिए आप का बहुत बहुत शुक्रिया !

आशु

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