Google+ Followers

Google+ Followers

Tuesday, May 6, 2008

बीते दीन

पुराने बीते दीनो की
यादों में खोया था
एक पेड़ के नीचे
जागा सा सोया सा
याद करने लगा
बीते लम्हों को
तभी
एक पत्ता
पीला सा मुरझाया सा
डाली से टूट कर
मेरी गोद मी आ गीरता है
और याद दीला देता है
कुछ मधुर षानो की
जब तुम्हारे संग
यहाँ बैठा करता था
हम हँसते थे
और कभी रो देते थे
और आज
तुम नही हो
और ना ही इस पेड़ पे
वह सब्ज़ पत्ते हैं
अब तो बस
सूखे मुरझाये पत्ते
मेरी यादों की तरह
नीरह से टूट रहे हैं
मेरे आसतितव
के ब्रिक्श से

2 comments:

Keerti Vaidya said...

wah..bahut khoob

likhtey rahey hamesha

Ashoo said...

Hi Keerti,

Thanks for your beautiful comments. I sincerely appreciate them as only an heart with similar thoughts can understand.

Regards,
Ashoo

Copyright !

Enjoy these poems.......... COPYRIGHT © 2008. The blog author holds the copyright over all the blog posts, in this blog. Republishing in ROMAN or translating my works without permission is not permitted.