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Thursday, May 15, 2008

भविष्य ...


यह सूखे हुए चेहरे
पड़े हुए उन पर
निराशायों के घेरे
हम से यह पूछते हैं
क्या उन से बुरा हुआ है
हम क्यों तरस न खाएं
उन के लिए भे कोई
बदली बरस तो जाए

देखो नगन खड़ा है
बच्चा सड़क पे किस का
भूख के मारे हुए
पेट खाली है जिस का
देखो वह चिल्ला रहा है
दोष है यह किस का
सूखे पिचके गाल है
क्या येही
भविष्य है भारत का?

क्यों ख़ुद मिटा रहे हो
अपने भविष्य को तुम
जाओ! उसे उठा
सीने से उसे लगाओ
अपने भविष्य को ख़ुद
अपने हाथों से सजाओ

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